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वैश्वीकरण :- अभिप्राय एवं दृष्टिकोण

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वैश्वीकरण से आपका क्या अभिप्राय है वैश्वीकरण शब्द का उपयोग अधिकांश सटीक अर्थों में नहीं होता इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इसका सही सही अर्थ क्या है एक अवधारणा के रूप में वैश्वीकरण की बुनियादी बात है प्रवाह । प्रवाह कई तरह के हो सकते हैं विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्से में पहुंचना कुंजिका एक हिस्से से दूसरी जगह जाना वस्तुओं का कई कई देशों में पहुंचना और उनका व्यापार तथा बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लोगों की आवाजाही यहां सबसे जरूरी बात है विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव जो ऐसे प्रवाहो की निरंतरता से पैदा हुआ है और कायम भी है। वैश्वीकरण के इस विषय में हम जानेंगे कि वैश्वीकरण का शाब्दिक अर्थ है स्थानीय क्षेत्रीय वस्तुओं या घटनाओं के विश्व स्तर पर रूपांतरण की प्रक्रिया है इसे एक ऐसी प्रक्रिया का वर्णन करने के लिए भी उपयोग किया जा सकता है जिसके द्वारा पूरे विश्व के लोग मिलकर एक समाज बनाते हैं वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को संसार की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करना है।वस्तुओं सेवाओं व्यक्तियों और ...

पटकथा लेखन तकनीक एवं विधियां - सुदर्शन कुमार 'चेतन'

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       पटकथा लेखन तकनीकि एवं विधियां

अपने लेख को प्रभावी लेख कैसे बनाएं Attractive and Effective writing skill

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प्रभावी लेखन क्या है? किसे हम प्रभावी लेखन मानते हैं और किसे नहीं? क्या प्रभावी लेखन की कोई परिभाषा निर्धारित हो सकती है? प्रभावी लेखन से क्या सीखा जा सकता है ? ऐसे अनेक प्रसन्न हैं जो प्रभावी लेखन को समझने के लिए उठाए जाते हैं। सबसे मूलभूत बात यह है कि प्रभावी लेखन से हमारा मतलब है ऐसा लेखन जिसको पढ़ कर पाठक प्रभावित हो उठे। उसके मन में भावनाओं का संचार हो वह भावुक हो उठे सोचने लगे, विचार करने लगे, हंसने लगे, रोने लगे यहां तक कि उस लेख को पढ़कर वह पहले जैसा इंसान ना रह जाए, हृदय परिवर्तन स्थिति उत्पन्न हो जाए, पाठक को उसमें कुछ रोचक, कुछ नया, कुछ अद्भुत लगने लगे इस किस्म के लेखन प्रभावी लेखन की श्रेणी में  रखें जाते हैं इन सारी बातों का एक मतलब यह निकल कर सामने आता है की प्रभावी लेखन की मुख्य विशेषता पाठक को सोचने समझने विचार करने और उसकी संवेदनाएं में तेजी लाने का काम करती है  प्रभावी लेखन को परखने की एक कसौटी यह भी है कि प्रभावी लेखन बहुत समय बीतने के बाद भी उतना ही प्रभावकारी बना रहता है जितना वह लिखकर पूर्ण होने के दौरान था यदि आप वर्तमान समय से लेकर अब तक देख...

सोशल मीडिया और लोकतंत्र - ( Democracy and social media)

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सोशल मीडिया और लोकतंत्र सोशल मीडिया और लोकतंत्र के इस विषय में हम चर्चा करेंगे कि सोशल मीडिया की भूमिका लोकतंत्र को कितना प्रभावित कर रही है वर्तमान समय में लोकतंत्र और अधिक मजबूत विस्तृत हुआ है क्योंकि सोशल मीडिया ने कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लोकतंत्र के भीतर चल रही गतिविधियों क्रियाकलापों पर अपनी प्रतिक्रिया देने का सीधा, सरल अवसर व मंच प्रदान किया है हालांकि अपनी प्रतिक्रिया देने के अवसर लोकतंत्र के प्रति पहले भी मौजूद थे लेकिन वह कहीं ना कहीं एक सीमित मात्रा में एक तरफा ही हुआ करते थे सोशल मीडिया ने बेहद कम समय में भारतीय समाज में मजबूती से अपनी पहचान कायम की है अपनी प्रकृति और स्वभाव में बेहद लोकतांत्रिक सोशल मीडिया ने भौगोलिक सामाजिक आर्थिक वर्ण और लिंग की सभी सीमाएं तोड़कर ना सिर्फ पारंपरिक मीडिया को चुनौती दी है बल्कि वही सही मायनों में आम आदमी का माध्यम बन गया है इसने संप्रेषण और संवाद को सरल त्वरित सस्ता समय से पहले और लगातार बना दिया है इसके द्वारा एकांत में बैठा प्रयोक्ता भी अपनी निजता के साथ समस्त आभासी संसार की अपूर्व रचना शक्ति को सामने लाने ...

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का साहित्यक चिंतन का दायरा कितना व्यापक है

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सूर्यकांत निराला परिचय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला हिंदी काव्य के आधुनिक काल के छायावाद युग के चार प्रमुख स्थानों में से एक माने जाते हैं जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा में छायावाद के प्रमुख स्तंभ माने जाते हैं सन 1898 में बंगाल के मेदिनीपुर जिले के महिषादल गांव में जाने माने साहित्यकार सूर्यकांत त्रिपाठी निराला का जन्म हुआ निराला को सर्वाधिक प्रसिद्ध दी सन 1916 में मिली जब उन्होंने कविता जूही की काली रात को रचा तब से वह मुक्त छंद के प्रवर्तक भी माने जाते हैं सन 1922 में वह रामकृष्ण मिशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका संबंध में के संपादन से जुड़ गए निराला जी 1923 -1924 में मतवाला के संपादक मंडल में शामिल हुए वह सारे जीवन आर्थिक परेशानी तो भोंकते रहे साथ ही पारिवारिक सुख से भी वंचित रहे स्थाई रूप से कहीं भी कार्य नहीं कर सके क्योंकि वह स्वाभिमानी व्यक्ति थे और अपने व्यक्तित्व से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकते थे अंत में इलाहाबाद आ कर रहे और सन 1961 में उनका देहांत हुआ निराला का काव्य संसार बहुत व्यापक है उनमें भारतीय इतिहास दर्शन और परंपरा को समझने की अपा...

क्या आपको भी लिखना पसंद है और रचनात्मक लेखन के बारे में कुछ जानकारियां जुटाना चाहते हैं

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जब कभी भी हम किसी भी तरह का रचनात्मक लेखन  शुरू करते हैं तो सर्वप्रथम हमें यह ध्यान देना जरूरी है कि हम उसको लेकर कितने उत्साहित हैं कितने जागरूक हैं और उससे संबंधित विषयों की लगातार पड़ताल करके कितनी जानकारियां इकट्ठा कर पाने में सक्षम है हालांकि शुरुआती दौर में समस्या उत्पन्न हो सकती हैं इसलिए हमें रचनात्मक लेखन से जुड़े लोगों के साथ अपने संबंध कायम करने चाहिए कुछ अच्छे रचनाकारों को पढ़ना चाहिए साथ ही केवल और केवल पढ़ना ही नहीं बल्कि उनके के बारे में जानकारियां इकट्ठा करना भी हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि वह अपने समय में इतने प्रसिद्ध क्यों है या थे उनकी रचनाओं में ऐसी क्या विशेषता,अलगपन होगा जो उनको साहित्यिक दुनिया अधिक लोकप्रिय बनाने में सक्षम हो पाया इसका आभास आप निरंतर करते रहें और प्रयास करें अपनी कला को अपने ढंग से प्रस्तुत करने की हमेशा याद रहे किसी रचनाकार व उसकी रचनाओं से प्रेरणा लें ना कि उसकी नकल करे क्योंकि पहचान उसी की होती है जो कुछ नया करता है अपने आसपास हो रही घटित घटनाओं देखने का अलग नजरिया दे जो एक नये रूप से उस विषय पर प्रकाश डाल सके आसपास चल रही घटना...

मेरे ना होने पर तुम्हारा एतराज जताना (शेर ओ शायरियों की दुनिया के कुछ नये किस्से)

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मेरे ना होने पर तुम्हारा एतराज जताना मुझे सुकून देता है कोई तो है हां, कोई तो है जो मेरे ना होने पर फिक्र मंद होता है ...... ये इश्क और इश्क का एहसास कितना लाजवाब है चश्म ओ सुकून चाहने वाला ही  इस दिल की प्यास है .......... आंखों में एक इंतजार पल रहा है तुमसे मिलने की राह तक रहा है कई लम्हों बाद एक मुलाकात तो हो  तू मेरे साथ हो और ए मौसम कम से कम हल्की बरसात तो हो  गुमसुम से रहे एक दूसरे में और ये इश्क की प्यास बरकरार रहे